सरस्वती पूजामाँ सरस्वती को समर्पित एक पवित्र पर्व है।माँ सरस्वती —जो विद्या, बुद्धि, संगीत और कला की देवी मानी जाती हैं।ये पूजा हमें यह नहीं सिखातीकि हम कितने पढ़े-लिखे हैं,बल्कि यह सिखाती हैकि हम कितना समझते हैं।क्योंकि ज्ञान सिर्फ़ किताबों में नहीं होता,ज्ञान हमारी सोच में होता है,हमारे व्यवहार में होता है।.माँ सरस्वती का स्वरूपअपने आप में एक संदेश है।वो श्वेत वस्त्र पहनती हैं —जो पवित्रता और शांति का प्रतीक है।उनके हाथों में वीणा होती है —जो हमें सिखाती हैकि जीवन भी एक संगीत है,बस सही सुर में जीना आना चाहिए।उनके पास एक पुस्तक होती है —जो ज्ञान का प्रतीक है।और उनका वाहन है — हंस।हंस हमें सिखाता हैकि सही और गलत में फर्क करना आना चाहिए।यानी माँ सरस्वती हमें सिर्फ़ पढ़ना नहीं,जीना सिखाती हैं।सरस्वती पूजाबसंत पंचमी के दिन मनाई जाती है।बसंत…यानि नई शुरुआत,नई सोच,नई ऊर्जा।जैसे बसंत मेंसूखी टहनियों पर भीनए फूल खिल जाते हैं…वैसे ही यह पर्वहमारे मन में भीनई उम्मीदें जगा देता है।.धार्मिक मान्यताओं के अनुसारमाँ सरस्वतीअज्ञान के अंधकार कोज्ञान के प्रकाश से दूर करती हैं।वो हमें सिखाती हैंकि सच्चा ज्ञानहमें घमंडी नहीं बनाता,विनम्र बनाता है।क्योंकिजो सच में जानता है,वो झुकना जानता है।सरस्वती पूजाखास तौर परविद्यार्थियों के लिए बहुत खास है।इस दिनबच्चे अपनी किताबें,कॉपियाँ,कलममाँ के चरणों में रखते हैं।ये सिर्फ़ एक परंपरा नहीं…ये एक वादा है।कि हम सिर्फ़ पढ़ेंगे नहीं,समझकर पढ़ेंगे।कि हम सिर्फ़ बोलेंगे नहीं,सोचकर बोलेंगे।.इस दिन लोगपीले कपड़े पहनते हैं,पीले पकवान बनाते हैं।कई जगहों परइस दिन पढ़ाई नहीं की जाती।क्यों?क्योंकि माना जाता हैकि आज का दिनदिखाने का नहीं,माँगने का है।ज्ञान माँगने का।बुद्धि माँगने का।सही रास्ता माँगने का।पीला रंगऊर्जा का प्रतीक है।उत्साह का प्रतीक है।नई शुरुआत का प्रतीक है।ये हमें सिखाता हैकि चाहे जीवन मेंकितना भी अंधेरा क्यों न हो…हमें उजाला बनना चाहिए।.सरस्वती पूजासिर्फ़ मंदिर में नहीं होती…ये मन में होती है।ये हमें सिखाती है —एकाग्रता,धैर्य,और सही सोच।ये हमें याद दिलाती हैकि असली जीतअंकों में नहीं,अच्छे इंसान बनने में होती है।.आज के समय मेंहर कोई आगे निकलना चाहता है।लेकिन सरस्वती पूजाहमें सिखाती हैकि आगे निकलने से पहलेअच्छा बनना ज़रूरी है।क्योंकिसफल इंसान बहुत मिल जाते हैं,लेकिनअच्छे इंसानबहुत कम।सरस्वती पूजाकोई रस्म नहीं…ये एक एहसास है।ये हमें याद दिलाती हैकि ज्ञान सबसे बड़ी शक्ति है।और सच्चा ज्ञान वही हैजो हमेंअहंकारी नहीं,इंसान बनाता है।
January 11, 2026
अधिकतर लोग मकर संक्रांति को बस तिल-गुड़, पतंग और दान का त्योहार समझते हैं।लेकिन इसके पीछे एक ऐसा सच छुपा है… जो किताबों में नहीं, परंपराओं […]

